भारत समृद्ध और सौर ऊर्जा संसाधनों वाला देश है। पिछले कुछ वर्षो में भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रयास भी किए है। भारत के भू-भाग में करीब पांच हजार किलोवाट घंटा प्रति वर्गमीटर के बराबर सौर ऊर्जा आती है। वहीं जिस दिन मौसम साफ और धूप खिली होती है उस दिन पांच किलोवाट प्रति घंटा वर्ग मीटर सौर ऊर्जा का औसत होता है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहा 2020 में कोरोना महामारी के समय सरकार द्वारा लगाया गया लॉकडाउन, इस समय हवा की गुणवत्ता इतनी ज्यादा साफ थी कि मार्च से लेकर मई महीने के बीच 8.3 प्रतिशत सौर ऊर्जा प्राप्त हुई। हमें लगभग तीन हेक्टेयर समतल भूमि की आवश्यकता केवल एक मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए होती है। वैसे तो सौर ऊर्जा से हम सभी परिचित हैं। सूर्य से प्राप्त होने वाली शक्ति ही सौर ऊर्जा कहलाती हैं। सोलर पैनलों की सहायता से सूर्य से प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा को हमारे द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। इसे विद्युत में बदलकर भी अन्य तरीकों से प्रयोग में लाया जा सकता है।

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हमारे देश में सौर ऊर्जा मुख्यतः रूफटॉप सौर ऊर्जा और सोलर पार्क से प्राप्त होती है जिसमें 40 प्रतिशत रूफटॉप और अन्य 40 प्रतिशत सोलर पार्क से मिलती है। हमारे देश में आम घरों में भी बिजली की बचत करने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली की समस्या अकसर बनी रहती है। देश में बिजली का उत्पादन करने में 16 प्रतिशत इसी से प्राप्त होता है। हालांकि, सरकार इसे और अधिक करने की कोशिश कर रही है। क्योंकि भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है। जहां सौर विकिरण वर्ष भर प्राप्त होता है मतलब सूर्य के प्रकाश के पूरे 3000 घंटे जिससे शायद पूरे भारत को रौशन किया जा सकता है। हमारी अर्थव्यवस्था को भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से काफी लाभ प्राप्त हो सकता है। जीडीपी दर को बढ़ाने और भारत को सुपरपावर बनाने की दिशा में यह एक अहम भूमिका निभाएगी।
देश के हर हिस्से में बिजली पहुंचाना अब भी एक चुनौती से कम नहीं है। जिस तरह से देश की आबादी बढ़ रही है उससे यह और भी जरूरी है कि देश के हर घर को वो सब सुविधाएं मिल सकें। कई राज्यों में जहां चौबीस घंटे बिजली की सुविधा रहती है वही ग्रामीण इलाकों में कभी दिनों तक बिजली की समस्या बनी रहती है। वर्ष 2040 तक भारत की आबादी चीन को पीछे छोड़ विश्व में पहले स्थान पर आ जाएगी। भविष्य में इतनी बड़ी आबादी को प्रत्येक सुविधा खासकर बिजली की आपूर्ति की जाए, सौर ऊर्जा के जरिए इस मांग को पूरा किया जा सकें इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश में रीवा में स्थापित 750 मेगावाट की ‘‘रीवा सौर परियोजना’’ को देश को सौंपा है। जिसे ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’’ ने विकसित किया है। ‘ग्रिड समता अवरोध’ को तोड़ने वाली यह परियोजना देश में पहले कभी नहीं बनी।राज्य के बाहर भी इस परियोजना के जरिए बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी। इसी के चलते ये देश की पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना भी बन गई है। कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा का यह स्त्रोत यदि सही तरीके से परियोजनाएं बनाकर इस्तेमाल किया जाए तो देश के हर हिस्से में बिजली आपूर्ति की राह आसान हो जाएगी। क्यांकि इसे प्राप्त करने के लिए किसी गैस ग्रिड या विद्युत ग्रिड की जरूरत नहीं है इसे कही भी लगाया जा सकता है। हालांकि, इस काम में सबसे बड़ी रूकावट है इसका अधिक खर्चीला और कुशल मानव संसधनों का अभाव। कितनी ही नीतियां और नियम बनने के बाद भी इसका खर्च कम नहीं हुआ है। जिन क्षेत्रों से अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है यानी गर्म व शुष्क क्षेत्र वहां भी गुणवत्ता पूर्ण सौर पैनल बनाने के लिए नीतियों का अभाव है। घरों की छतों पर यदि ये लगाया जाए तो खर्चा लाख रूपए से कम नहीं आता ऐसे में आम आदमी या ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह से इस खर्च को वहन किया जा सकता ये सोचने वाली बात है। सरकार की तरफ से यदि बेहतर नीतियां बनाई जाए तो शायद यह मुमकिन हो पाएगा।
इसी का परिणाम राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन के रूप में देखने को मिला है जिसका उददेश्य बिजली उत्पाद और अन्य उपयोंगों के लिए सौर ऊर्जा के विकास एंव उपयोग को बढ़ावा देना है। भारत सरकार ने भी फोटोवाल्टिक क्षमता को बढ़ाने के लिए सोलर पैनल निर्माण उदयोग को 210 अरब रूपए की सरकारी सहायता देने की योजना बनाई है जिसमें 2030 तक सरकार ने कुल ऊर्जा का 40 प्रतिशत हरित ऊर्जा से उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है।
जिस तेजी से भारत सुपर पावर बनने की राह में आगे बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से देश की आबादी भी पहले स्थान पर पहुंचने की राह में है इतनी बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को उचित परियोजना का सहारा लेकर ही आगे बढ़ना होगा । सौर ऊर्जा बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा स्त्रोत है। बस जरूरत सरकार की तरफ से नियम कानून बनाने की है ताकि आम जन भी इसका लाभ उठा सकें।
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