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इंटरनेट से प्रभावित होती युवा पीढ़ी

internet ka prabhav

इंटरनेट टेक्नालिजि के इस वक्त में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इंटरनेट से परिचित ना हो। आज जब सब एक क्लिक में उपलब्ध हो जाता हे ऐसे में ये इंटरनेट हमारी जरूरत बन गया हे। इसने हमारी जीवन को इस हद तक प्रभावित किया है खासकर उस युवा वर्ग को। यही युवा आबादी इस इंटरनेट का प्रमुख हिस्सा कही जा सकती है। इंटरनेट का आविष्कार ज्ञान, अपने अनुभव को बढ़ाने और विचारों को प्रसारित करने के लिए किया गया था लेकिन आज इसका अधिक इस्तेमाल हमें गूंगा बना रहा है। जिसके चलते आज के युवा कई सारी गतिविधियों में लिप्त नजर आते हैं। ये आज की पीढ़ी की सोच और मानसिकता को बहुत तेजी से बदल रहा है। इंटरनेट का प्रयोग अक्सर दो पहलुओ को लेकर ही सामने आया है। या तो इसका उपयोग अपने ज्ञान का विस्तार करने या इसका दुरूपयोग करते ही मिला हे। आज उम्र की सीमा इंटरनेट इस्तेमाल करने की राह में बाधा नहीं बंधती है। वयस्कों से ज्यादा बच्चों को आज मोबाइल फोन, एप्स की अच्छी खासी जानकारी होती है। यही कारण है कि आज के युवा आज अपनी छोटी से छोटी जरूरत को पूरा करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगते है। सामान्य और आवश्यक उपयोग के अलावा युवाओं को उन गैजेटस को छोड़ने में काफी कठिनाई होती है जो इंटरनेट की सेवा से जुड़ें हैं। इसका सबसे सटीक उदाहरण है आनॅलाइन खेले जाने वाले गेम्स जिनकी आदि हो चुकी इस युवा पीढ़ी पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ देखने को मिल जाता है। इंटरनेट का युवाओं के दिमाग पर इस तरह कब्जा हो चुका है कि यह अब एक आदत में बदलता जा रहा है। जिसपर सोच विचार करने की जरूरत है। इसके चलते इसके कुछ प्रभाव भी साफ देखने को मिल जाते है-

  1. युवा पीढ़ी इंटरनेट की इस दुनिया में आत्मविश्वास से भरी नजर आती है लेकिन यह आत्मविश्वास सामने आने पर कही खोता नजर आता है। इसलिए ये स्क्रीन के माध्यम से बातचीत करने में ज्यादा सहज महसूस करते है। विश्वास, आत्मविश्वास और खुशी एक इंटरनेट की साइड या आनॅलाइन रहने से नहीं मिलती है। ये पीढ़ी इन तथ्यों को समझने में नाकाम रही है। अनिद्रा और असुरक्षा इंटरनेट के अत्यधिक इस्तेमाल करने के कारण युवाओं में सबसे बड़ी समस्या के रूप में भी उभर रहा है।
  2. इंटरनेट पर  घंटो बिताने के बाद युवाओं को अन्य कार्यो, खासकर की शारीरिक गतिविधियों के लिए समय न मिलना नई बात नहीं रह गई है। उनका मानसिक विकास ना होने का सबसे बड़ा कारण भी यही बन रहा है। एक उचित खेल खेलने के लिए बाहर जाने की तुलना में आनॅलाइन गेम खेलना युवाओं की पहली पंसद बन गया है। जिसके चलते उनके शारीरिक और मानसिक विकास में कमी महसूस भी की जा रही है। दिमाक से जुड़ी हुइ्र्र बीमारियां, आत्मविश्वास की कमी, मोटापे का बढ़ना जैसी समस्या ऐसी ही है जो शारीरिक गतिविधि में टेक्ॅनालिजि के अधिक इस्तेमाल से उपजे हो सकते है।
  3. पुरानी पीढ़ी के लोगों को अधिक स्वस्थ होने का सबसे बड़ा कारण रहा है उनके लाइफस्टाइल में उचित नियमों, खानपान, और व्यायाम का होना। यही कारण हे कि पिछली पीढ़ी के युवाओं की तुलना करें तो आज की पीढ़ी के युवाओं से वह कही ज्यादा उत्साहवर्धक और खुश नजर आते हैं। आज के युवा काम को जितनी आसान हो सकें करना पंसद करते है। हां ये कहा जा सकता है कि टेक्नालिजी का इस्तेमाल हमारी सहूलियत के लिए करना सही है लेकिन इसके कारण हमारी शारीरिक गतिविधियों को नुकसान भी पहुंच रहा है। स्मार्टफोन्स में खोए ऐसे ही कई युवा अक्सर र्दुघटना का शिकार होते हुए भी नजर आए है।
  4. अपनी प्रतिभा को अक्सर इंटरनेट का इस्तेमाल करके ही दिखाना उन्हें वास्तविक जीवन में कई नीचे पहुंचा देता है। कैमरे का आदि हो चुका ऐसा युवा वर्ग केवल उसी दुनिया में जीना पंसद करता है। ऐसा ही नजारा हमें तब देखने को भी मिला जब भारत सरकार द्वारा चीनी ऐप टिकटॉक को बैन कर दिया गया। युवाओं ने इस कदम की सराहना तो की लेकिन ज्यादा युवा रोते बिलखते और सरकार के इस फैसले पर नाराज होते दिखाई दिए। यही कारण है कि ये युवा पीढ़ी अपना बेहतर स्तर प्रदर्शित करने में नाकाम साबित हो सकती है।
  5. इंटरनेट हमारी जरूरत के लिए बनाई गई एक बेहतर टेक्ॅनालिजि है हमारी कई जरूरतों के लिए एक बेहतर विकल्प। लेकिन इसे समस्या बनाया है हमनें। टेक्ॅनालिजि जब मानव संपर्क का एक अकेला विकल्प बन जाए तो वो समस्या पैदा करने लग जाती है। इसी के चलते समाज में इन युवाओं को भौतिक उपस्थिति का अभाव महसूस किया जा रहा है। इंटरनेट की अच्छी और बुरी दोनों सहुलियतों का इस्तेमाल हमपर निर्भर करता है। इसलिए जरूरी है कि युवाओं को इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों से परिचित कराया जाए। यदि बच्चों को एक उम्र के बाद इसके इस्तेमाल की सहुलियत दी जाए तो इन प्रभावों से बचा जा सकता है। इंटरनेट आपको वहीं देता है जो आप उससे मांग रहें हैं। इसलिए इसको वरदान और अभिशाप की सीमा समझते हुए इस्तेमाल करने देना हमारी निजी जिम्मेदारी बन जाती है।

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