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स्टेचू ऑफ़ यूनिटी (Statue of Unity) की यह बातें आपको जरुर जाननी चाहिए

स्टेचू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) को भारत के लौह पुरूष कहें जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में बनाया गया है। सरदार वल्लभ भाई पटेल को अखंड भारत की नींव स्थापित करने के लिए सदैव याद रखा जाएगा। आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे सरदार पटेल अहिंसा आंदोलन में महात्मा गांधी के जैसे ही अपनी एक अलग छवि स्थापित करने में कामयाब रहे। आजादी के समय भारत की स्थिति को देखते हुए सरदार पटेल ने ही आगे आकर इसकी अखण्डता की रक्षा की। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा देशी रियासतों, रजवाड़ो को हिन्दुस्तान या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रियासत रहने का प्रस्ताव दिया गया उसमें सरदार पटेल ने ही इन रियासतों को भारत में शामिल करने के लिए अहम भूमिका निभाई। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत 562 रियासतों के साथ कैसे अखण्ड रहेगा इसकी कल्पना सरदार पटेल ने हकीकत में परिवर्तित करके दिखाई। इसी लौहपुरूष को स्टेचू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) की याद में जीवित रखना भी उतना ही वास्तविक मालूम होता है। हालांकि, अखण्ड भारत इनकी छवि को खुद में जिन्दा रखें हुए हमेशा याद करता रहेगा। गुजरात के अहमदाबाद शहर में नर्मदा नदी पर स्थित यह प्रतिमा 182 मीटर ऊचांई के साथ विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा होने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। 2989 करोड़ की लागत से बनी इस प्रतिमा के बनने की शुरूआत 2013 में हुई तथा 2018 में बनकर तैयार हुई इस प्रतिमा को देश को सौंपा गया। इस प्रतिमा का वास्तुशिल्प राम वी सुतार ने तैयार किया। सरदार वल्लभ भाई पटेल की 143 वी वर्षगांठ पर इस प्रतिमा का अनावरण किया गया।


गुजरात के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट नाम से एक अलग सोसाइटी का गठन किया गया। स्टेचू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) मूवमेंट नामक एक आउटरीच ड्राइव को प्रतिमा के निर्माण के समर्थन के लिए शुरू किया गया था। जिसका उददेश्य किसानों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कृषि उपकरणों को दान देने के लिए कहा गया ताकि प्रतिमा के लिए आवश्यक लोहे को इकटठा किया जा सकें। जिसके परिणाम स्वरूप साल 2016 में 135 मीटिक टन स्क्र्रैप लौहा एकत्र किया गया जिसमें से लगभग 109 टन लौहे का उपयोग प्रतिमा की नीवं बनाने के लिए किया गया था।दुनियाभर से सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए मूर्तियों का अध्ययन किया गया तथा अन्त में इतिहासकारों, कलाकारो और शिक्षाविदों ने राम वी सुतार द्वारा तैयार डिजाइन को चुना। जिसकों परिभाषित करते हुए उनके पुत्र ने कहा कि यह प्रतिमा अभिव्यक्ति, गरिमा और दयालुता को दर्शाती है जिसमें उनका व्यक्तित्व निखरकर सामने आता है। सरंचना की कुल उचांई 240 मीटर है जिसका आधार 58मीटर और शेष प्रतिमा 182 मीटर है। प्रतिमा को 182 मीटर रखने का मुख्य कारण यह भी रहा चूंकि गुजरात विधानसभा में सीटों की संख्या भी 182 है।
स्टेचू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल द्वारा तैयार किया गया था। जिसमें गुजरात सरकार द्वारा अधिकांश राशि को जुटाया गया था। गुजरात की सरकार द्वारा 2012 सें 2015 तक के राज्य बजट में 500 करोड़ रूपए इस परियोजना के लिए आवंटित किए गए थे। वहीं केन्द्रीय सरकार द्वारा 2014 में 200 करोड़ प्रतिमा के निर्माण के लिए दिए गए। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा फंड का योगदान भी दिया गया था।
प्रतिमा को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। जिनमें से केवल तीन में आम जनता को जाने की इजाजत है। पहले क्षेत्र में एक स्मारक उद्यान और एक संग्रहालय भी है। यह संग्रहालय सरदार पटेल के जीवन और उनके योगदानों को सूचीबद्ध करता है। एक दृश्य-श्रव्य गैलरी है जो सरदार पटेल पर 15 मिनट की लंबी प्रस्तुति प्रदान करती है। इस गैलरी तक पहुंचने के लिए प्रतिमा के पैरों में दो लिफ्ट तैयार की गई है जो 26 लोगों को सिर्फ 30 सेकेन्ड में गैलरी तक ले जाती है। दूसरा क्षेत्र प्रतिमा (Statue of Unity) के पैरों तक है जबकि तीसरा 153 मीटर की उंचाई पर देखने वाली गैलरी तक फैला हुआ है। चौथा क्षेत्र रखरखाव के लिए है जबकि पांचवा तथा अंतिम क्षेत्र जिसमें मूर्ति के सिर और कंधे शामिल है।
1 नवंबर 2018 को प्रतिमा को आम जनता के लिए खोल दिया गया। इसके खुलने के बाद करीब 11 दिनों में 128,000 से भी ज्यादा पर्यटकों ने प्रतिमा का दौरा किया। नवंबर 2019 में करीबन 15,036 पर्यटकों को इस प्रतिमा ने अपनी और आकर्षित किया जो स्टेचू ऑफ लिबर्टीर् से ज्यादा है। इसे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की सूची में आठ वंडर्स ऑफ एससीओं में भी शामिल किया गया है। प्रतिमा के अनावरण के पहले वर्ष में प्रतिमा ने 29 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया और 82 करोड़ रूपये टिकट राजस्व के चलते सरकार को प्राप्त हुए।
प्रतिमा का वास्तुशिल्प जितना शानदार है उससे कई ज्यादा शानदार वह इतिहास रहा जिसे जानकर सरदार पटेल को याद किया जाता है। स्टेचू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) को देखने पर उनके चेहरे पर वह भाव साफ साफ देखे जा सकते है। भारत के इस लौह पुरूष की छवि भारत की अखण्डता में वर्षो वर्ष कायम रहेगी।

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